नमस्कार।
ग़ज़लकार तो नहीं हूं, सही पूछा जाए तो ग़ज़ल किस तरह से लिखी जाती है, यह भी नहीं जानता हूं, मगर बहुत पहले से ग़ज़ल लिखनी प्रारंभ कर दी थी। िग़ज़ल लिखना कोई शगल नहीं है, यह मैं जानता हूं, लेकिन शौक बड़ी चीज है, ग़ज़ल सुनता रहता हूं, मगर कभी-कभी लिखता भी रहता हूं। कोशिश करुंगा कि इस ब्लॉग के माध्यम से अपनी बात कह सकूं। शेष फिर,